Adhuri Tasveer

तस्वीर बनीथोड़ी अधूरीशायद कोई रंग रह गयाजो मेरे पास था ही नहींउन्हें ढूँढने निकला हूँ सुबह की घास में कुछसमंदर सा हराढलती साँझ मेंवो मायूस लाल रंग वो ऊँचे आसमान मेंवो गहरा नीलावो हस्ते कमल मेंमुस्कुराता हुआ पीला वो टूटते लहर मेंमैला सा सफ़ेदऔर उस पिघलती बर्फ़ वालाचमकीला सफ़ेद हर अनोखा रंग समेट करवहाँ पहुँचाContinue reading “Adhuri Tasveer”

Khwabon ka kaphila

ऐसा कौनसा ख़्वाब है जो सच्चा ना लगा ऐसा कौनसा मौक़ा है जो मुमकिन ना लगा पर सचाई और ख़्वाब में शायद नींद खुलने का फ़रक है नींद खुली और आँखें मलि आँखों के मैल के साथ सारे ख़्वाब भी धूल गए दिन की भाग दौड़ में वो मौक़ा भी खो गया हक़ीक़त बनने काContinue reading “Khwabon ka kaphila”

Amma ka phone aaya

अम्मा का फ़ोन आयाहाल चाल पूछामौसम का हाल भी समझाफिर कुछ और कहना चाहातो हमने कहाआज थोड़ा व्यस्त हूँकल काल करूँगा अम्मा चुप हो गयीकहते कहते रुक गयीऐसा हर बार सुना थापर इस व्यस्त होने का तर्कउनको कुछ विपरीत सा लगाकई सवाल मन में उठेकल और आज में फ़रकबहुत गहरा नज़र आया बेटा, ये कैसाContinue reading “Amma ka phone aaya”

Shakti hoon, Saksham hoon

मैं कौन हूँजानती हूँकिसी नाम से सीमित नहीं क्या चाहती हूँजानती हूँकिसी सहारे की ज़रूरत नहीं किसकी तलाश हैजानती हूँमें अपने आप में पूरी हूँ, ये मानती हूँ देवी हूँ, पूजा होती है मेरीजानती हूँपर बस औरत रहना चाहती हूँ मेरी फ़िक्र है तुम्हेंमैं जानती हूँपर अपना ख़्याल खुद रखना जानती हूँ शक्ति हूँसक्षम हूँऔरतContinue reading “Shakti hoon, Saksham hoon”

Doston ki Mehfil

दोस्तों की महफ़िल हैछलकेंगे पैमानेक़िस्सों का सिलसिला चलेगाबनेंगे कई फ़साने वक्त नया हैनए दोस्त, नए याराने हैंपर जब भी मिलेंगे वो दोस्तगूंजे वही तराने हैं कई साल पुरानी बात हैकई साज़ और ताल मिलाने हैंफिर वहीं से शुरू करेंगेवही रस्ते वही मोड़ पुराने है कुछ तो है जो जोड़े रखता हैरिश्ता तो कोई नहीं हैवक़्तContinue reading “Doston ki Mehfil”

Aakhon ka Kasur

ये आँखेंसब देखती हैक़सूर क्या इनका हैमन का शीशा हैजो बिखरा हुआ है कौन सी बातें हैंजो कहें हमजो अछी लगेंशब्दों का ज़ायक़ाकुछ बिगड़ा हुआ है सारा जहां ज़हन में हैक्यूँ फ़िज़ूलजमाने से ख़फ़ा हैंमन का चश्मा हैजो ज़रा पोशिदा है

Social Distancing

शायद मुमकिन नहींफिर भी कोशिश कर लेता हैये दिल, समझता ही नहीं है मर्ज़ ऐसा हैकी दूरी हैदिलों की करीबी कुछ कम तो नहीं दूर होफिर भी तुम्हारा साथ हैये भी कुछ कम तो नहीं है

Melting Boundaries (Pighalte Dayre)

कुछ दायरेकुछ रस्मों रिवाजमेरी हदें तय किया करती हैं मेरा वजूदमेरा मज़हबमेरी पहचान बताया करती हैं मुझे कहाँ जाना हैमुझे क्या करना हैअक्सर ये बयान करती हैं किनारों में रहकर महफ़ूज़ रहा हूँमुक़र्रर मंज़िल की तरफ़ लाचार बहता रहा हूँअपनी पहचान भूल, खारा हो गया हूँ समंदर मेरी मंज़िल नहींमैं कोई दरिया भी नहींमैं तोContinue reading “Melting Boundaries (Pighalte Dayre)”